NIOS Deled 501 Assignment 501 Question 2 Answer in Hindi


अपने आस-पास के कुछ विद्यालयों का सर्वेक्षण
Ans ; प्रारंभिक शिक्षा से संबंधित मुददों के आकलन के लिए जब मैंने अपने आस-पास के 10 विद्यालयों का सर्वेक्षण किया तो जो मुख्य मुददे उभरकर सामने आए , उनकी सूची नीचे दी जा रही है | सबसे पहले मैं उन मुख्य मुददों को सूचीबद्ध कर रहा हूँ तत्पश्चात उनके समाधान के तरीके सुझाऊंगा |

प्रारंभिक शिक्षा के मुददे :-

1. निम्न पंजीयन दर
विद्यालयों के सर्वेक्षण के दौरान बच्चों की संख्या बहुत ही कम देखने को मिला l जब मैंने पड़ताल किया तो इनके पीछे एक और ही मुददा उभरकर सामने आया l
2. विद्यालयों की अधिक दूरी
अधिक दूरी तथा भौतिक सुविधाओं के अभाव के कारण विद्यालयों में बच्चों का नामांकन कम हुआ , लेकिन जो थोडा- बहुत नामांकन हुआ भी तो पहुँच से बाहर रहने के कारण बच्चे विद्यालय नहीं आ पाते थे l
3. उच्च ड्राप आउट दर
बीच में विद्यालयों को छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अप्रत्याशित रूप से अधिक पाया गया l अधिकांश बच्चे ऐसे हैं जो गरीब होने के कारण काम करके पैसे कमाना चाहते हैं l ड्राप आउट लिस्ट में अधिकांश लड़कियां हैं जो अपने माता-पिता के कारण तथा छोटे बच्चों की देखभाल के लिए घर में रहने को विवश है l
4. कम योग्य या अप्रशिक्षित अध्यापक
अधिकांश प्रारंभिक विद्यालयों में अध्यापकों के पास योग्य डिग्री नहीं है या है भी तो वे प्रशिक्षित नहीं है l इस स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना भी बेमानी है l
5. असमानता
मैंने देखा कि कई विद्यालयों में नामांकित बच्चों के लिंगानुपात में बहुत बड़ा अंतर है l लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या काफी कम है l
6. आधारभूत संरचना की कमी
सर्वेक्षण के दौरान सबसे बड़ा मुददा जो सभी विद्यालयों में एक समान था – आधारभूत संरचना की घोर कमी l सभी में पर्याप्त भवनों का अभाव था , किसी में चहारदीवारी था तो किसी में नहीं l शौचालयों की पर्याप्त सुविधाओं का अभाव तथा खेलकूद के लिए पर्याप्त मैदान की कमी लगभग सब में एक समान था l पर्याप्त बेंच डेस्क के अभाव में बच्चे जमीन पर बैठ कर पढने को मजबूर थे l
7. सामाजिक भेदभाव
मैंने देखा कि विद्यालय में उपस्थित अधिकांश बच्चे गरीब व पिछड़े तबके से ताल्लुक रखते हैं l पता चला कि समाज के उच्च और अमीर तबके के लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं l
8. मध्याहन भोजन में गड़बड़ी
प्रारंभिक विद्यालयों में सरकार द्वारा चलाया गया मध्याहन भोजन योजना खानापूर्ति योजना बनकर रह गया है l शिक्षक पढाना छोड़ खाना बनवाने में व्यस्त हैं , मेन्यू के हिसाब से खाना नहीं बनता और योजना में लूट ऐसी कि लोग इसे खिचड़ी अभियान कह कर उपहास उड़ाते हैं l
9. स्वच्छता का अभाव
बच्चों में स्वच्छता का घोर अभाव देखने को मिला l अधिकांश बच्चे गंदे फटेहाल देखे गए l ऐसा प्रतीत हुआ कि अभिभावक भी सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों के प्रति उदासीन रवैया अपनाएं हुआ है l
मुददों के समाधान हेतु सुझाव :-
उपरोक्त मुददों के समाधान हेतु मैं निम्नलिखित सुझाव देना चाहूँगा –
1. विद्यालयों में बच्चों के नामांकन दर को बढ़ाने तथा बच्चों के ठहराव हेतु उचित दूरी पर या उनके टोला या बसाव क्षेत्र में ही विद्यालय स्थापित करने के लिए सरकारी स्तर पर गंभीर पहल होना चाहिए l
2. विद्यालयों में लैंगिक असमानता को कम करने के लिए माता-पिता तथा अभिभावकों को जागरूक करने की आवश्यकता है l इस कार्य में स्थानीय जनप्रतिनिधि का भी भरपूर सहयोग लिया जाना चाहिए l
3. सरकार विद्यालयों में पर्याप्त योग्य शिक्षकों की बहाली करें , आधारभूत संरचना जैसे पर्याप्त भवन , ब्लैक बोर्ड , शौचालयों की सुविधा, बैठने की व्यवस्था तथा खेल कूद के लिए पर्याप्त जमीन की व्यवस्था करें l
4. विद्यालयों में सामाजिक भेदभाव को कम करने के लिए समाज के बुद्धिजीवी वर्गों को आगे लाकर विद्यालय प्रबंधन में उनकी सहभागिता को बढ़ाने में स्थानीय शिक्षकगण तथा पदाधिकारी उचित सहयोग प्रदान कर सकते हैं l
5. सभी शिक्षकगण बच्चों में स्वच्छता का भाव जगायेंगे और अभिभावकों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करेंगे l
6. मध्याहन भोजन योजना के नकारात्मक छवि को बदलने के लिए पदाधिकारियों के द्वारा तथा शिक्षकों के द्वारा ईमानदार प्रयास किया जाना चाहिए l

उपरोक्त सुझावों पर यदि गंभीर पहल किया जाये तो निश्चित रूप से प्रारंभिक विद्यालयों के उपरोक्त मुददों को निपटाया जा सकता है तथा प्रारंभिक शिक्षा के सर्विकीकरण में द्रुत गति से परिणाम हासिल किया जा सकता है l
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